Home » आपके पत्र » प्याऊ का मामला

प्याऊ का मामला

👤 | Updated on:2016-05-03 01:04:38.0
Share Post

 दिल्ली उच्च न्यायालय ने चांदनी चौक क्षेत्र से अवैध निर्माण गिराने का आदेश दिया। इसी के लपेटे में गौरीशंकर मंदिर का प्याऊ और गुरुद्वारा शीशगंज का प्याऊ भी आ गया। निगम के दस्तों ने अन्य अवैध निर्माणों के साथ ही उन्हें भी तोड़ दिया। इस पर सिख समाज ने हल्ला मचा रखा है। यह एकदम ही गलत बात है। अवैध निर्माण तो अवैध है चाहे वह मंदिर या मस्जिद अथवा गुरुद्वारा या चर्च में ही क्यों न हुआ हो? जैन गौरीशंकर मंदिर का प्याऊ भी तोड़ा गया वहां तो कोई नहीं बोला फिर सिख कौम क्यों उबाल खा रही है। अच्छा होता यदि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी इस बात को सही मायनों में लेती और कोर्ट के आदेश की इज्जत रखते हुए इसकी पालना करती। यदि प्याऊ बनाना ही है तो गुरुद्वारे के अंदर के हिस्से में ही कोई स्थान चुन कर बनाया जा सकता है। इस पर तलवारें भांजने की और हथियार निकालने की तैयारी करने की क्या जरूरत है? अब वहां पर सब सिखों को एकत्र होने का संदेश भेजा जा रहा है और कहा जा रहा है कि सब मतभेद भुलाकर प्याऊ को बचाओ। यह कौन-सी अक्लमंदी है। भारत तो पहले ही सांप्रदायिकता की आग झेल रहा है उस पर यह नया बवाल क्यों? -इन्द्र सिंह धिगान, किंग्जवे कैम्प, दिल्ली। भारत के प्रति प्रेम ने आंखें कीं नम धर्म सापेक्षता एवं संतुलन सिद्धांत के प्रतिपादक व युवा आदर्श सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश सुमन ब्रिटेन के प्रिन्स विलियम व डचेज ऑफ कैंब्रिज कैट मिडिल्टन की भारत यात्रा का स्वागत करते हुए उन्हें लिखे पत्र में इंडिया गेट पर उनके द्वारा शहीदों को श्रद्धांजलि देते समय की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा है कि आपके द्वारा दी गई टिप्पणी ने आंखें नम कर दीं। श्री सुमन ने पत्र में उनके अन्य पारिवारिक सदस्यों की कुशलता व प्रसन्नता की सकारात्मक आशा व्यक्त की है। पत्र ब्रिटेन के दूतावास के माध्यम से भेजा गया है। -मुकेश सुमन, नजीबाबाद, बिजनौर (उप्र)। एलियन और आईएएस दूसरी दुनिया का प्राणी है एलियन। धरती पर लोगों के बीच कम ही दिखता है। उसकी अलग सोच कुछ अलग ही कार्यप्रणाली है इनको वही सुन-समझ सकता है जो उनकी चुंबकीय तरंगों की फील्ड में हो। अपने देश में अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग किस्म के एलियन हैं जिनका रिमोट कंट्रोल कुछ दबंग किस्म के नेताओं के हाथों में है बाकी तो ये धुर बनाते रहते हैं। इन एलियन का इतना आकर्षण है यदि पुंवारे हैं तो शादी के बाजार में इनकी बोली पांच करोड़ से शुरू होती है। इनका बा]िद्धक स्तर भी कमाल का होता है। यदि कोई मैकेनिकल की डिग्री लेकर आता है तो यहां की भारत/राज्य सरकारों का मानना है वही मछली पालन का भी निर्देशक बन सकता है पशुपालन का भी। ये उस पानी की तरह है जिस पात्र में डाल दो उसी का रंगरूप ले लेता है। हर कार्य में फिट हर जगह हरफनमौला। अपने देश में चार प्रकार के एलियन पाए जाते हैं। एक वह है जो सीधे आकाश से उतरे और भारत की धरती पर आए। इनकी सीनियोरिटी नाम से नहीं बैच से जाती जाती है। दूसरे प्रकार के एलियन आकाश से तो टपके लेकिन खजूर के पेड़ पर काफी दिन लटके रहे। बाद में रिटायरमेंट के कुछ दिनों पहले एलियन बने। तीसरे वे हैं जो एक विशेष जाति में जन्म लेने के कारण एलियन बने। चौथे वे हैं सेना की नौकरी के बीच एलियन बने। इन चारों एलियन की कार्यप्रणाली और सोच कभी एक दूसरे से मैच नहीं खाती। डायरेक्ट वाला अपने आपको इन तीनों से सबसे सुपीरियर समझता है और इनको घास नहीं डालता यदि इनमें से एक कुछ करना भी चाहे तो तीनों ऐसी टांग घसीटते हैं। सारी योजनाएं धराशायी हो जाती हैं। -आनंद मोहन भटनागर, लखनऊ।  

Share it
Top