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कैंसर और पथरी में तुलसी का सेवन लाभदायक

👤 | Updated on:2016-05-10 00:25:01.0
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 भारत में तुलसी सिर्प धार्मिक इस्तेमाल के लिए ही नहीं उपयोग की जाती है, बल्कि इसके औषधीय गुण भी हैं। कैंसर और पथरी जैसी गंभीर बीमारियों को भी तुलसी के लगातार सेवन से ठीक किया जा सकता है। यह घर में आसानी से उपलब्ध हो जाती है, इसलिए यह सबसे किफायती औषधि है। तुलसी में एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो इंफेक्शन जैसे सर्दी-जुकाम से राहत देते हैं। इस पौधे के क्या फायदे हैं, आइए जानते हैं। पथरी निकालने में मददगार, तुलसी की पत्तियां किडनी के स्वास्थ्य के लिए काफी अच्छी होती हैं। तुलसी रक्त से यूरिक एसिड लेवल को कम करती है, जो किडनी में पथरी बनने का मुख्य कारण होती है। इसके साथ ही किडनी को साथ भी करती है। तुलसी में मौजूद एसेटिक एसिड और दूसरे तत्व किडनी की पथरी को गलाने का काम करते हैं। साथ ही इसका पेनकिलर प्रभाव पथरी के दर्द को दूर करता है। किडनी की पथरी को निकालने के लिए तुलसी की पत्तियों के जूस को शहद के साथ मिलाकर 6 महीने तक रोज पिएं।2-बुखार उतारने में मदद करती है। तुलसी में कीटाणुनाशक और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। एंटी-बायोटिक बुखार कम करने के लिए भी जरूरी होता है। यह इंफेक्शन की वजह से होने वाली बीमारियों और मलेरिया से भी राहत देती है। आयुर्वेद के अनुसार, जो इंसान बुखार से पीड़ित हो उसे तुलसी का काढ़ा बहुत ही फायदा करता है। इसे बनाने के लिए तुलसी की कुछ पत्तियों को आधे लीटर पानी में इलायची पाउडर के साथ मिलाकर तब तक के लिए जब तक यह मिक्सचर आधा न रह जाए। तुलसी की पत्तियों और इलायची पाउडर का अनुपात (1ः0ः3) होना चाहिए। इस काढ़े को चीनी और दूध के साथ मिलाकर प्रत्येक दो से तीन घंटे में जरूर पिएं। यह उपचार बच्चों को बुखार से जल्दी आराम पहुंचाता है। डायबिटीज को कम करता है, तुलसी की पवित्र पत्तियां एंटी-ऑक्सीडेंट्स और एसेंशियल ऑयल से भरपूर होती हैं, जो युगेनॉल, मेथाइल युगेनॉल और कार्योफेलिन का निर्माण करती हैं। ये पदार्थ पैनक्रियाटिक बेटा सेल्स (सेल्स जो इंसुलिन को स्टोर करते हैं और उसे बाहर निकालते हैं) को ठीक तरह से काम करने में मदद करते हैं। यह इंसुलिन की सेंसिविटी को बढ़ाते हैं। यह ब्लड से शुगर लेवल भी कम करते हैं और डाइबिटीज का ठीक तरह से ईलाज करते हैं। दिल का रखती है ख्याल, तुलसी में शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट तत्व- युगेनॉल होता है। यह तत्व ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करके दिल का देखभाल करता है और कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करता है। हार्ट को हेल्दी बनाने के लिए रोज खाली पेट सूखी तुलसी की पत्तियां चबाएं। इससे किसी भी तरह के हृदय संबंधी रोग दूर रहते हैं। थकान दूर करती है, रिसर्च के अनुसार तुलसी स्ट्रेस हार्मोन-कोर्टिसोल के लेवल को संतुलित रखती है। इसकी पत्तियों में शक्तिशाली एटॉप्टोजन गुण होते हैं, जिन्हें एंटी-स्ट्रेस एजेंट भी कहते हैं। यह नर्वस सिस्टम और ब्लड सर्पुलेशन को नियमित रखता हैं। साथ ही थकान के दौरान बनने वाले फी रेडिकल्स को कम करता है। जिन लोगों की नौकरी बहुत थकाऊ हैं उन्हें रोज दो बार तुलसी की लगभग 12 पत्तियां खानी चाहिए। -मुकेश अग्रवाल, कंझावला, दिल्ली। दर्पण प्रेम का क्या रहस्य है दार्शनिक सुकरात सुंदर नहीं थे। उनकी एक ऐसी आदत थी जो उनके शिष्यों को परेशानी में डालती थी। वे समझ नहीं पाते थे कि सुंदर न होते हुए भी सुकरात बार-बार अपना चेहरा आईने में क्यों देखते हैं? चेहरा सुंदर हो तो आईने में देखा भी जाए, लेकिन असुंदर चेहरे वाले गुरुदेव का दर्पण प्रेम का क्या रहस्य है। ये उनकी समझ से परे था। एक दिन शिष्यों ने देखा कि सुकरात काफी देर से आईना देख रहे हैं। शिष्य अचानक हंस पड़े। सुकरात उनकी हंसी सुनकर मुस्कुराए। उन्हें अपने पास बुलाया। फिर आईना एक तरफ रखते हुए बोले, तुम लोग क्या इस बात पर हंस रहे हो कि मैं भद्दा हूं, फिर भी शीशा क्यों देखता हूं? तुम्हें शायद नहीं मालूम कि सुंदर आदमी को शीशा देखने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। जो स्वयं सुंदर है वह शीशा क्यों देखे? शीशा देखने की जरूरत उसे है, जिसका चेहरा भद्दा है। मैं शीशे में देखते हुए यह सोचता हूं कि मेरा यह चेहरा भद्दा तो है, लेकिन मुझसे ऐसा कोई काम न हो जाए, जिससे यह और अधिक भद्दा बन जाए। इसलिए खुद को सावधान करने के लिए मैं बार-बार आईना देखता हूं। -सुरेश सैनी, पहाड़गंज, दिल्ली। आरिफ सुभानी पक्के दरवेश थे आरिफ सुभानी नाम के एक पक्के दरवेश थे। उन्हें दुनिया की किसी भी वस्तु से मोह नहीं था। पहनने के लिए कपड़ों के अलावा उनकी, अपनी कहलाने वाली कोई भी संपत्ति नहीं थी।शांतिप्रिय और सादगी पसंद होने के कारण उनके विचार दूसरों से मेल नहीं खाते थे। वो मंदिर, मस्जिद में भी कोई भेद नहीं मानते थे। एक बार उनके पास एक व्यक्ति रियाज सीखने आया। तब उन्होंने उस व्यक्ति से पूछा, क्या तुम्हें और कोई दूसरा आदमी नहीं मिला। उस व्यक्ति ने कहा कि नहीं, आपसे ही सीखना है। इस पर सुभानी ने कहा, भाई यदि तू मुस्लिम है, तो ईसाइयों के पास जा, अगर शिया है, तो इखराजियों (एक मुस्लिम संप्रदाय) के पास जा, और अगर सुन्नी है तो ईरान जा। यह सब सुनकर उस व्यक्ति को कुछ अटपटा लगा। तब आरिफ सुभानी ने कहा कि, इसका मतलब यह है कि तुम जिस धर्म को मानते है, उस धर्म के विपरीत जाओ, वहां जाकर तुम्हें इतनी सहनशक्ति आ जाए कि तुम्हें किसी बात का दुःख न हो, तो तुम्हें अपने विरोधियों के पास रहने में हिचकिचाहट नहीं होगी। तभी तुमको सच्ची शांति मिलेगी। सुभानी ने कहा कि मेरा आशय यह है कि कोई भी धर्म, दूसरे धर्म का बाधक नहीं होता। खोट हमारे मन में ही होता है कि हम अपने धर्म को श्रेष्ठ और दूसरों के धर्मों को तुच्छ समझते हैं और उन्हें कुधर्म मानकर घृणा करते हैं। हमें उनके पदचिन्हों पर चलने का प्रयास करना चाहिए जिससे आपसी प्रेम बढ़े। -नीलम शर्मा, विकासपुरी, दिल्ली।    

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