Home » आपके पत्र » धारा 370 देश के साथ मजाक

धारा 370 देश के साथ मजाक

👤 | Updated on:2016-05-11 00:11:08.0
Share Post

 आजादी के बाद से भारत सरकार जम्मू-कश्मीर के विकास पर 50 हजार करोड़ से ज्यादा खर्च कर चुकी है ल]िकन क्या केंद्र द्वारा भेजे गए पैसे से वहां के नागरिकों को कोई लाभ पहुंचा आज भी राज्य के लोगों की गरीबी जस की तस है। भेजे गए धन का एक बहुत बड़ा भाग शासक वर्ग ने हड़प लिया। शासक वर्ग के माध्यम से यह पैसा उन लोगों के हाथों में पहुंच गया जो पाकिस्तान की आईएसआई के इशारों पर भारत के विरोध में हमेशा खड़े रहते हैं। घाटी के मुट्ठीभर लोगों ने पूरे राज्य में अराजकता की स्थिति पैदा कर रखी है। यही लोग विकास और सरकारी नौकरियों की भर्ती में लद्दाख और जम्मू क्षेत्र के लोगों की उपेक्षा कर रहे हैं। स्थिति आज राज्य की यह है कि संसद द्वारा पारित 900 से ज्यादा कानून आज तक राज्य में लागू नहीं हुए। क्या अजीबोगरीब कानून है। जम्मू-कश्मीर में रहने वाली महिला यदि भारत में रहने वाले किसी अन्य राज्य के आदमी से शादी कर ले तो उसकी राज्य की नागरिकता समाप्त यदि औरत किसी पाकिस्तानी नागरिक से विवाह कर ले तो पाकिस्तानी नागरिक को स्वत ही जम्मू-कश्मीर की नागरिकता मिल जाती है। वह सम्पत्ति खरीद सकता है लेकिन भारत के अन्य राज्य का रहने वाले को यहां सम्पत्ति खरीदने का अधिकार नहीं है। -आनंद मोहन भटनागर, लखनऊ। माले मुफ्त दिले बेरहम डटे रहो मुन्ना भाई खबर आई है कि दिल्ली के सीएम श्री अरविन्द केजरीवाल के घर और दफ्तर का बिजली-पानी का बिल गत मार्च से इस साल फरवरी तक यानि 11 महीने का बिल आया है कोई 12 लाख रुपए। मतलब एक लाख रुपए महीना। यह हाल है एक ऐसे आम आदमी का जो आम आदमी होने का दम भरते हुए सीएम बने हैं। उन्हें इस बात का भलीभांति पता है कि उनका यह बिल उनकी जेब से नहीं जाएगा और सरकार के खजाने से जाएगा। फिर इतनी लापरवाही क्यों? सरकारी खजाने का यह दुरुपयोग नहीं है तो और क्या है? यदि इतना ही पैसा अपनी जेब से देना पड़े तो नानी याद आ जाए। सरकारी पैसे का यह मतलब नहीं कि आप बिना सोचे-समझे उसका उपयोग दुरुपयोग करें। ठीक ही कहा किसी ने कि माले मुफ्त दिले बेरहम। -इन्द्र सिंह धिगान, किंग्जवे कैंप, दिल्ली। आईएनए मार्पिट में बिजली की आंख-मिचौली आए दिन दिल्ली के हर कोने में बिजली की कटौती लगातार जारी है। जिसके चलते आम दिल्लीवासियों को रोजमर्रा के कार्यों में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। फोन करने पर फोन भी नहीं उठाते कि कट कब तक का है। वहीं आईएनए मार्पिट स्थित जब दुकानदार अपनी दुकानें खोलते हैं तो उन्हें पता नहीं कि बिजली कब चली जाए। जिसके चलते उनकी दुकानदारी पर काफी फर्प पड़ता है। जिस दुकान में बिजली ही नहीं है वहां कौन ग्राहक सामान खरीदने आएगा। यह सिलसिला पूरा दिन चलता रहता है। जिसके चलते मार्पिट के दुकानदारों की रोजी-रोटी का खतरा पैदा हो रहा है। अत संबंधित विभागों से अनुरोध है कि इस ओर विशेष ध्यान दें जिससे यहां के वासियों को इस समस्या से निजात मिल सके। -बीएल सचदेवा, 263, आईएनए मार्पिट, नई दिल्ली।      

Share it
Top