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रमजान रहमत वाला महीना

👤 | Updated on:2016-06-21 00:00:46.0
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 रमजानुल मुबारक के मुकद्दस महीने का इस्लाम धर्म मे अलग ही महत्व है। इस महीने मे अल्लाह का पवित्र कलाम कुरआन-ए-पाक नाजिल हुआ। रमजान का रोजा मजहबे इसलाम का अहम रूकन है। नबी-ए- करीम मोहम्मद स.अ. की हदीस है, जिसने रमजान मे रोजे सिर्फ अल्लाह के लिए समझ रखे है तो उसके सब सगीरा गुनाह माफ कर दिये जाएगे। और उन्हाने एक जगह और फरमाया है कि रोजेदारो के मुंह की बू अल्लाह के नजदीक मुश्क की खूशबू से भी ज्यादा प्यारी है। रोजा, पवित्र माह रमजानुल मुबारक की सबसे अहमद इबादत है। रोजे के अरबी मायने है सौम और सौम के मायने होते है रूकना। सुबह सादिक से लेकर सूरज डूबने तक खाने-पीने से रोकने को सौम कहते है। अगर किसी ने सुबह सादिक के बाद खा-पी लिया या फिर सूरज डूबने से पहले खा-पी लिया तो उसका रोजा नही हुआ। रमजान के सारे रोजे रखना मुसलमान मर्द-औरत-आकिल-बालिग पर फर्ज है। जो शक्स किसी शरई उज्र के बगैर रोजे नही रखेगा, वह शक्स गुनहगार होगा। इस मुकद्दस माह का पहला अशअरा रहमत, दूसरा अशअरा मगफिरत और तीसरा अशअरा जहनम से निजात का है। रसूल अल्लाह ने इस माह के बारे मे कहा कि इस महीने मे चार काम ज्यादा किया करो-कलमा तैयबा लाइलाहा इल्लल्लाह और असतगफार पढ़ना, जनत की तलब व दोजख की आग से पनाह मांगना और अल्लाह की इबादत। इस महीने मे अल्लाह पाक अपने बन्दो के गुनाह माफ कर उनकी मगफिरत करते है। और उन पर अपनी रहमत नाजिल करते है।        -शाही अराफात सैफी, नजीबाबाद जनपद बिजनौर (उप्र)। प्रधानमंत्री मोदी सरकार के दो साल श्री नरेंद्र मोदी की सरकार की अन्य उपलब्धियों के अलावा असम में भाजपा सरकार, जम्मू-कश्मीर राज्य में घोर विरोधी पीडीपी के साथ राज्य के विकास के लिए गठबंधन सरकार बनाई। केरल में एक सीट के अलावा तीसरे मोर्चे के रूप में उभरी भाजपा मतदाताओं का प्रतिशत बढ़ा। पश्चिम बंगाल में सीटें बढ़ीं। अब ईरान (मुस्लिम राष्ट्र) 12 समझौते किए। पर्यटन, तेल, व्यापार आदि के अलावा चाबहार बंदरगाह के निर्माण भारत मुख्य हैं। श्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने राष्ट्रहित जो कीर्तिमान स्थापित किए हैं आजाद भारत में अद्वितीय है। मोदी सरकार ने भारत को दब्बू से दबंग बना दिया। शक्तिमान मोदी का जवाब नहीं सिर्प और सिर्प विकास सबका बिना भय और भेदभाव। -बीएल सचदेवा, 263, आईएनए मार्पिट, नई दिल्ली। प्रतिदिन प्रदूषण का बढ़ता प्रकोप पूरी दुनिया इस वक्त बढ़ते प्रदूषण से परेशान है। दिल्ली हो या बीजिंग। पेरिस हो या लंदन या फिर मेक्सिको सिटी। हर जगह लोग बढ़ते प्रदूषण की फिक्र में दुबले हो रहे हैं। बिगड़ते हालात से निपटने के लिए कुछ कदम भी उठाए जा रहे हैं। मसलन, दिल्ली में ऑड-इवन कार फॉर्मूले से प्रदूषण कम करने की कोशिश हो रही है। इसी तरह के प्रयोग बीजिंग, ब्रसेल्स और लंदन जैसे शहरों में भी हो रहे हैं, ताकि लोग बेहतर हवा में सांस ले सकें। लातिन अमेरिकी देश मेक्सिको की राजधानी मेक्सिको सिटी, दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर कहा जाता है। इसे ये दर्जा 1992 में संयुक्त राष्ट्र की प्रदूषण की निगरानी करने वाली संस्था ने दिया था। मेक्सिको सिटी एक पठार पर बसा हुआ है। इसके चारों तरफ ज्वालामुखी के छोटे बड़े पहाड़ हैं। चौतरफा पहाड़ों से घिरा होने की वजह से भी यहां खुली हवा कम ही आ पाती है। फिर शहर में बढ़ती गाड़ियों ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। आज शहर के 2.3 करोड़ निवासियों के लिए सांस लेने का मतलब है जहरीली हवा को अपने शरीर में भरना। इतने बुरे हालात से निपटने के लिए हाल ही में मेक्सिको सिटी ने कारों को लेकर सख्त नियम लागू किया है। इसके तहत हर कार मालिक को हफ्ते में एक दिन अपनी गाड़ी सड़क पर उतारने की पाबंदी झेलनी होगी। इसके अलावा महीने के एक शनिवार को भी कारों को घर से निकालने पर रोक लगी रहेगी। ये पाबंदी पांच अप्रैल से शुरू होकर तीस जून तक चलेगी। सरकारी और स्कूल की गाड़ियां, इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारों और सार्वजनिक वाहनों को इस पाबंदी से छूट मिली है। कारों पर पाबंदी का मेक्सिको सिटी का ये पहला तजुर्बा नहीं। पिछले तीस सालों से शहर में इस किस्म के प्रयोग चल रहे हैं। वैसे कारों पर रोक के नियम आजमाने वाला मेक्सिको सिटी कोई पहला शहर नहीं। पिछले साल 27 सितंबर को ही पेरिस में बढ़ते प्रदूषण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए एक अभियान चलाया गया था। इसमें लोगों को कारों को छोड़कर साइकिल जैसे प्रदूषण न फैलाने वाले वाहनों का इस्तेमाल करने के लिए हौसला दिया गया। खुद पेरिस को ये मिसाल पड़ोसी देश बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स से मिली, जहां पर रविवार का दिन कार-फी घोषित किया गया है। वैसे ब्रसेल्स या पेरिस में तो ये अभियान लोगों को प्रदूषण के खतरों से आगाह करने के लिए चलाए गए। वहीं मेक्सिको में तो कारों पर पाबंदी का नियम, प्रदूषण को कम करने के लिए लागू किया गया है। पिछले महीने ही वहां हालात इतने बिगड़ गए थे कि प्रदूषण की निगरानी करने वाली संस्था को इमरजेंसी का एलान करना पड़ा था। शहर की 47 लाख में से 11 लाख गाड़ियों पर हमेशा के लिए रोक लगा दी गई थी। साथ ही लोग कार से न चलें, इसके लिए सरकारी बसों और मेट्रो में मुफ्त में सफर करने का ऑफर भी दिया गया। भारत में भी इस तरह के तजुर्बे किए जा रहे हैं। इसी साल, जनवरी में दिल्ली में ऑड-इवन फॉर्मूला लागू किया गया, पंद्रह दिन के लिए। अब अप्रैल में दोबारा ये प्रयोग किया जा रहा है। दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए ही 1998 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी ऑटो और बसों को पेट्रोल-डीजल के बजाय सीएनजी से चलाने का आदेश दिया था। अभी हाल ही में दस साल से ज्यादा पुरानी डीजल गाड़ि यों को दिल्ली में चलाने पर रोक लग गई है। साथ ही ज्यादा ताकतवर इंजन वाली डीजल गाड़ियों का लाइसेंस जारी करने पर भी अदालत ने पाबंदी लगा दी है। खुद सरकार ने नई गाड़ियों की खरीद पर चार फीसद सेल्स टैक्स लगा दिया है, ताकि लोग कम गाड़ियां खरीदें। इन सबका मकसद, सड़क पर उतरने वाली गाड़ियां कम करके प्रदूषण में कमी लाना है। चीन की राजधानी बीजिंग भी खराब हवा और धुंध के लिए बदनाम है। वहां भी हालात सुधारने के लिए प्रशासन ने कई प्रयोग किए हैं। 2008 के ओलंपिक से पहले बीजिंग में गाड़ियों को एक दिन के अंतर पर निकालने का नियम लागू किया गया था। पिछले साल विक्ट्री डे परेड से पहले भी ये नियम लागू किया गया। इससे बीजिंग के प्रदूषण में काफी कमी आई थी। मगर ये फौरी ही थी। जैसे ही पाबंदी हटी, वैसे ही बीजिंग का नीला आसमान फिर धुंध में लिपटा नजर आया। -सोनवीर यादव, कंझावला, दिल्ली।        

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