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मार्केट में अनेक चाय के फ्लेवर्स हैं

👤 | Updated on:2016-08-04 00:46:43.0
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 शरीर को ताजगी देने के साथ चाय सेहत के लिए भी बहुत ही फायदेमंद होती है। इसके कई फ्लेवर्स मार्केट में मौजूद हैं, जिनके बहुत सारे अलग-अलग फायदे हैं। कुछ लोग सुबह और शाम के वक्त ही चाय पीना पसंद करते हैं, लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि किसी भी प्रकार के दर्द, सूजन और अपच की समस्या में राहत पाने के लिए कभी भी चाय पी जा सकती है। लेकिन दूध वाली चाय का सेवन नहीं बल्कि इन चाय का स्वाद लें और बीमारियों को मिनटों में काफूर करें। आइए जानते हैं, कौन-सी चाय से क्या फायदे हो सकते हैं। जिंजर टी. यह चाय स्वाद के साथ ही सिरदर्द भी झट से गायब कर देती है। लेकिन ध्यान रहे कि जिंजर टी आप सिर्प पानी से बनाएं, दूध का इस्तेमाल न करें। इस चाय को बनाने के लिए अदरक के कुछ टुकड़े पानी में उबाल लें। फिर इसे ढक कर 20 मिनट के लिए छोड़ दें। थोड़ा ठंडा होने पर अदरक छानकर उसे पी लें। किसी भी प्रकार का दर्द इसे पीने से झट से दूर हो जाता है। एक्सरसाइज और वर्पआउट से भी आपको लग रहा है कि आपका वजन कम नहीं हो रहा, तो आप दिन में ग्रीन टी पीना शुरू करें। ग्रीन टी में एंटी-ऑक्सीडेंट्स होने की वजह से यह बॉडी के फैट को खत्म करती है। एक स्टडी के अनुसार ग्रीन टी बॉडी के वजन को स्थिर रखती है। ग्रीन टी से फैट ही नहीं, बल्कि मेटाबॉल्जिम भी स्ट्रांग रहता है और डाइजेस्टिव सिस्टम की परेशानियां भी खत्म होती हैं। जिंजर टी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जिसका उपयोग जोड़ों और नसों में सूजन से राहत पाने के लिए घरेलू नुस्खे के तौर पर किया जाता है। सुबह के समय सूजन की समस्या सबसे ज्यादा होती है, इसलिए कोशिश करके इसे सुबह-सुबह पीने की आदत डालें। विटामिन्स, मिनरल्स और एमिनो एसिड्स की मात्रा ब्लड सर्पुलेशन को सही रखने का काम करती है, जिससे कॉर्डियोवैस्कुलर की प्रॉब्लम, हार्ट अटैक और स्ट्रोक के होने की संभावनाएं काफी हद तक कम हो जाती हैं। साथ ही अदरक, मोटापा कम करने में भी मददगार होती है। जिंजर टी में अदरक के कारण एंटी-ऑक्सीडेंट्स की भरपूर मात्रा मौजूद होती है जो बॉडी की इम्यूनिटी पावर को बढ़ाती है। साथ ही इसे पीने से कैंसर से भी बचा जा सकता है। जिंजर टी पीने से तनाव भी दूर होता है। इसका कारण इसमें मौजूद अरोमा और हीलिंग जैसे तत्वों की मात्रा है। ग्रीन टीः इसके बहुत सारे फायदे हैं। इसे बनाने के लिए गर्म पानी में कुछ तुलसी की पत्तियां, थोड़ा सा शहद और नींबू का रस मिलाएं। फिर उसमें ग्रीन टी बैग्स डालें। ये चाय ब्लड प्रेशर को बैलेंस रखने में मदद करती है, साथ ही मोटापे से लड़ने में सहायक है। दिन में तीन कप ग्रीन टी पीने से वजन कम होता है। स्किन को अल्ट्रावायलेट किरणों के कारण होने वाले नुकसान से भी बचाती है। ग्रीन टी पीने से ब्लड में ग्लूकोज की मात्रा कंट्रोल रहती है, जो मोटापे की समस्या से राहत दिलाती है। ग्रीन टी पीने से ब्लड गाढ़ा नहीं होता। क्लॉटिंग की समस्या नहीं होती, नसों में ब्लड का सर्पुलेशन बराबर बना रहता है जिससे दिल की बीमारियों से बचा जा सकता है। दांतों को मजबूत बनाता है। ग्रीन टी में पाया जाने वाला एंटी-ऑक्सीडेंट केमिकल कैटेचीन बैक्टीरिया को खत्म करने में सहायक होता है। इसे पीने से दांतो को मजूबती के साथ सांसों की बदबू, गले के इन्फेक्शंस और कई प्रकार की मुंह की बीमारियां कोसों दूर रहती हैं। ग्रीन टी एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी से भरपूर होने के कारण चेहरे पर असमय पड़ने वाली झुर्रियों और बुढ़ापे की समस्या से भी राहत दिलाता है। साथ ही सूरज की हानिकारक किरणों से भी इसे पीकर बचा जा सकता है। ग्रीन टी ब्रेन सेल्स की सुरक्षा के साथ ही उनके डैमेज को भी रोकती है और साथ ही उनकी रिपेयरिंग का भी काम करती है। इससे याद्दाश्त बेहतर होती है। लैवेंडर टीः पाचन क्रिया सुधारने के लिए ये टी बेस्ट है। रोजाना इसे पीने से पेट में इन्फेक्शन नहीं होता। इसे बनाने के लिए लैवेंडर के कुछ पत्ते पानी में डालकर उबाल लें। चार मिनट तक तेज आंच पर इसे उबलने दें। इसके बाद इसे छानकर पी लें। खाने-पीने की गड़बड़ी के कारण हुई अपच की समस्या से राहत दिलाने में लैवेंडर टी बहुत ही असरदार है। इसके साथ ही पेट के छालों, गैस की समस्या में भी इसे पीने से बहुत फायदा मिलता है। नींद न आने की प्रॉब्लम से राहत मिलता है। ऑफिस में काम का तनाव, पारिवारिक समस्याएं आदि कई कारणों से लोगों में नींद न आने की समस्या आम हो चुकी है। ये और कई प्रकार की बीमारियों तनाव, डिप्रेशन का भी कारण बन रही हैं। इन सबसे छुटकारा पाने के लिए दिन में सिर्प एक कप लैवेंडर टी काफी है। लैवेंडर टी पीने से कुछ ऐसे ऑयल का स्राव होता है जो माइग्रेन के दर्द को दूर करने में कारगर हैं। इससे उल्टी, जी मिचलाना दूर होता है। गर्भवती महिलाओं में सुबह-सुबह जी मिचलाने की समस्या आम बात होती है, साथ ही बहुत सारे लोगों को सफर के दौरान उल्टी की भी शिकायत होती है। इन सभी प्रकार की समस्याओं से तत्काल निजात पाने के लिए लैवेंडर टी बहुत ही फायदेमंद है। दालचीनी-पुदीना टी ः इसे बनाने के लिए दालचीनी और पुदीने को पानी में डालकर 5-7 मिनट उबालते हैं, फिर इसे पीते हैं। जोड़ों में दर्द की शिकायत है तो इससे आराम मिलेगा। सर्दी और बुखार से दूर रहने में भी यह चाय मदद करती है। पेट में अगर अचानक दर्द हो, तो यह चाय आराम दिलाएगी। थकान मिटाने में भी कारगर है। दालचीनी में सर्दी-खांसी के वायरस से लड़ने वाले तत्व मौजूद होते हैं जिसे पीने से बॉडी की इम्यूनिटी बढ़ती है। यह बॉडी को सभी प्रकार के इन्फेक्शंस से दूर रखती है। वैसे तो एक्सरसाइज और दवाएं आर्थराइटिस के इलाज के लिए बेहतर मानी जाती हैं, लेकिन बहुत ही कम लोग इस बात से वाकिफ होंगे कि दालचीनी-पुदीने वाली चाय पीने से भी बहुत आराम मिलता है। साथ ही जोड़ों में होने वाली सूजन की प्रॉब्लम भी दूर होती है। रिसर्च में इस बात को माना गया है कि इस चाय को पीने से बॉडी से बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होने लगती है जिससे कई प्रकार की बीमारियों, खासतौर से दिल की बीमारियों से बचा जा सकता है। रोज टीः इसमें विटामिन सी की मात्रा काफी होती है। इसे पीने से आंखों को ठंडक मिलती है। इसे बनाने के लिए रोज एक्सट्रैक्ट (गुलाब की पत्तियों) को पानी में दो मिनट उबालें। छानकर पी लें। रोज टी दिमाग के लिए ब्रेन बूस्टर का काम करती है। बड़ों के साथ-साथ बच्चों में भी अल्जाइमर की समस्या ज्यादातर देखी जा रही है जिसका सीधा संबंध ब्रेन से है। इससे बचने के लिए रोज टी का रोजाना सेवन फायदेमंद साबित हो सकता है। जरा-सा मसालेदार, ऑयली खाना सेहत के साथ ही पेट के लिए भी नुकसानदायक होता है, जिसका सबसे पहला असर अपच के रूप में सामने आता है। इससे बचने के लिए रोज टी पीनी चाहिए। जानकर अजीब लग सकता है, लेकिन ये सच है। -हरनेक सिंह, पंजाबी बाग, दिल्ली। राष्ट्रकवि को `जाति कवि' बनाने के फायदे! हिन्दी के जाने माने कवि रामधारी सिंह दिनकर की किताब `संस्कृति के चार अध्याय' और `परशुराम की प्रतीक्षा' की गोल्डन जुबली समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जिन दो पंक्तियों को उद्धृत करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के लोगों से जातपात से ऊपर उठने का आह्वान किया वो पचास साल पहले कांग्रेस को सलाह के तौर पर लिखी गई थीं। उनसे भी चालीस साल पहले गांधीजी ने 1934 में उत्तर बिहार के भूकंप को जातिवाद और छुआछूत खत्म न किए जाने का प्रकोप कहा था और इनसे ऊपर उठने की अपील की थी। जाति और जातिवाद इतनी हल्की बीमारी होती तो इन महापुरुषों की निस्वार्थ सलाह और झिड़की पर गायब हो गई होती। इस बार की सलाह तो चुनावी राजनीति और दिनकर की बिरादरी को आकर्षित करने की बहुत साफ रणनीति के चलते आई है। इसलिए इससे पहले जैसे नतीजों या बिहारी समाज द्वारा अपने व्यवहार पर गौर करने जैसे नतीजे की उम्मीद भी नहीं की जा सकती। मोदी ने रामधारी सिंह दिनकर के परिजनों से भी मुलाकात की। भूमिहार बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की एक अगड़ी और संपन्न जाति है जो संख्या में ज्यादा न होकर भी वोट की राजनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण जाति है। अपनी संख्या से ज्यादा प्रभाव रखने और एकजुट होकर वोट डालने के चलते भी इस जाति का राजनीतिक महत्व ज्यादा है। इसलिए प्रधानमंत्री के आह्वान पर जाति टूटेगी या भाजपा एक-दो जातियों पर निर्भरता से ऊपर उठेगी, इसकी उम्मीद कम है। हां कुछ लोगों के लिए यह जरूर दिलचस्पी का विषय हो सकता है कि कोई पढ़ी-लिखी और खुद को अगड़ा मानने वाली बिरादरी ऐसे आयोजनों और संकेतों के आधार पर अब भी वोट करेगी क्या? राष्ट्रकवि या जाति का कवि? यह अवसर दिनकर की दो किताबों के पचास साल बाद नए संस्करण के विमोचन का था। उनके नाम और सम्मान के लिए बड़े स्तर पर और आयोजन करने का निश्चय भी यहां व्यक्त किया गया। आयोजन के साथ उन्हें `भारत रत्न' देने जैसी मांग को जोड़कर उनका यश बढ़ाने का दावा भी किया गया। पर असल में यह राष्ट्रकवि को एक बिरादरी का कवि बनाने जैसा हो सकता है। दिनकर हिन्दी के सर्वाधिक लोकप्रिय और पढ़े जाने वाले कवि रहे हैं। -मुकेश अग्रवाल, कंझावला, दिल्ली।        

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