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कृषि कानून वापसी मोदी का मास्टर स्ट्रोक ?

👤 Veer Arjun | Updated on:23 Nov 2021 4:30 AM GMT

कृषि कानून वापसी मोदी का मास्टर स्ट्रोक ?

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-अनिल नरेन्द्र

मेघालय के गवर्नर सत्यपाल मलिक ने 20 अक्तूबर को बीबीसी को दिए साक्षात्कार में कहा था, कृषि कानून पर वेंद्र सरकार को ही मानना पड़ेगा, किसान नहीं मानेंगे और एक महीने बाद उनकी यह बात सच साबित हो गईं। मोदी सरकार ने नए कृषि कानून वापस लेने का पैसला ले लिया है।

इसकी टाइमिग की चर्चा खूब हो रही है। अगले हफ्ते 29 नवम्बर से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने वाला है। पांच राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जिनमें उत्तर प्रादेश सबसे बड़ा राज्य है। जहां एक दिन पहले ही अमित शाह को पािमी उत्तर प्रादेश की कमान सौंपी गईं थी।

लेकिन गुरु नानक देव के प्राकाश पर्व के दिन प्राधानमंत्री मोदी ने इसकी घोषणा कर सबको चौंका दिया। सोशल मीडिया पर इसके साथ ही मास्टर स्ट्रोक ट्रेंड कर रहा है जिसमें दावा किया जा रहा है कि यह पैसला एक मास्टर स्ट्रोक है। इस वजह से अब इस टाइमिग में पंजाब एंगल भी जुड़ गया है। सालों से भाजपा कवर कर रही एक वरिष्ठ पत्रकार कहती हैं कि मोदी सरकार के इस पैसले के पीछे उत्तर प्रादेश और पंजाब, दोनों कारण हैं।

जाहिर है कि उत्तर प्रादेश चुनाव पर असर मुख्य वजह है। लेकिन पंजाब भी कईं लिहाज से भाजपा के लिए अहम राज्य है। पंजाब पाक सीमा से लगा राज्य है। बहुत सारे खालिस्तानी ग्राुप अचानक सव््िराय हो गए हैं। ऐसे में चुनाव से पहले कईं गुट पंजाब में एक्टिव हैं जो मौके का फायदा उठाने की फिराक में हैं। जब भाजपा और अकाली दल का गठबंधन हुआ था, उस वक्त दोनों दलों के शीर्ष नेता लाल वृष्ण आडवाणी और प्राकाश सिह बादल की सोच यह थी कि अगर सिखों की नुमाइंदगी करने वाली पाटा (अकाली दल) और खुद को हिन्दू के साथ जोड़ने वाली पाटा (भाजपा) साथ में चुनाव लड़े तो राज्य और देश की सुरक्षा के लिहाज से यह बेहतर होगा। इस वजह से सालों तक यह गठबंधन चला। पंजाब लांग टर्म के लिए भाजपा के लिए बहुत अहम है। 80 के दशक की चीजें दोबारा से वहां शुरू हो जाएं, ऐसा कोईं नहीं चाहता। इस वजह से भी वेंद्र सरकार ने यह पैसला लिया। नए कृषि कानून की वजह से अकाली दल ने पिछले साल भाजपा से नाता तोड़ लिया था और एनडीए से अलग हो गए थे। अकाली दल भाजपा की सबसे पुरानी साथी थी। एक विशेषज्ञ ने टिप्पणी की—देर आए दुरुस्त आए। यह फैसला 700 किसानों की बलि देने के बाद आया है।

मोदी सरकार ने नए कृषि कानून रद्द खुद नहीं किए, उनको किसानों के गुस्से की वजह से ऐसा करना पड़ा। इस पैसले से उनके अनुसार पंजाब में भाजपा को कोईं सियासी फायदा नहीं होने वाला। बेशक वैप्टन अमरिन्दर सिह के उनके साथ आने से भी शायद ही पंजाब में भाजपा की दाल गले। यह देखना बाकी है कि मोदी सरकार के इस पैसले के बाद अकाली दल वापस एनडीए के साथ आती है या नहीं? एक दिन पहले ही उत्तर प्रादेश को कईं इलाकों में बांटते हुए भाजपा में पािमी उत्तर प्रादेश की कमान अमित शाह को दी गईं थी। यह अपने आपमें इस बात का स्पष्ट संकेत था कि इस क्षेत्र को भाजपा कितना अहम मानती है। वुछ विश्लेषकों के अनुसार किसान आंदोलन का असर उत्तर प्रादेश में 100 सीटों पर पड़ सकता है। वुल मिलाकर भाजपा समर्थक इसे प्राधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मास्टर स्ट्रोक मान रही है। बाकी तो समय ही बताएगा।

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