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जानें कब कैसे करें श्राद्ध -भूल से भी न करें ये गलतियां लगेगा पितृदोष

👤 manish kumar | Updated on:1 Sep 2020 11:59 AM GMT

जानें कब कैसे करें श्राद्ध -भूल से भी न करें ये गलतियां लगेगा पितृदोष

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पितृपक्ष, कनागत या श्राद् ये तीन नाम जरूर हैं पर इसका मतलब एक ही है.ऐसे दिन जब हम अपने पितरों यानी अपने पूर्वजों की आत्मा के लिए तर्पण करते हैं. हर साल पितृपक्ष पर पूर्वजों के लिए श्राद्ध कर्म किया जाता है. इन दिनों पिंडदान, तर्पण, हवन और अन्न दान मुख्य होते हैं.ये दिन पितरों को समर्पित होते हैं.

ऐसी मान्यता है कि जो लोग पितृ पक्ष में पूर्वजों का तर्पण नहीं करते, उन्हें पितृदोष लगता है…श्राद्ध के बाद ही पितृदोष से मुक्ति मिलती है. धार्मिक मान्यता के मुताबिक पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके तर्पण के लिए श्राद्ध किया जाता है.. हिंदू धर्म में श्राद्ध का विशेष महत्व होता है. इस साल पितृपक्ष 1 सितंबर से शुरू हो रहे हैं. आखिरी श्राद्ध यानी अमावस्या श्राद्ध 17 सितंबर को होगा.

पितृ पक्ष 2020 प्रारंभ और समाप्ति तिथि

पितृ पक्ष प्रारंभ तिथि- 1 सितंबर 2020

पितृ पक्ष समाप्ति तिथि -17 सितंबर 2020

श्राद्ध का अर्थ श्रद्धा पूर्वक अपने पितरों को प्रसन्न करने के लिए होता है..सनातन मान्यता की मानें तो जो परिजन अपना देह त्यागकर चले गए हैं, उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए सच्ची श्रद्धा के साथ जो तर्पण किया जाता है, उसे श्राद्ध कहते हैं…ऐसा कहा जाता है कि मृत्यु के देवता यमराज श्राद्ध के दिनों में जीव को मुक्त कर देते हैं, ताकि वो अपने परिजनों के यहां जाकर तर्पण ग्रहण कर सकें.

अब आपको बताते हैं कि पितर किसको कहा जाता है. जिस किसी के परिजन चाहे वो मैरिड हो या अनमैरिड, बच्चा हो या बुजुर्ग, स्त्री हो या पुरुष उनकी मृत्यु हो चुकी है उन्हें पितर कहा जाता है.पितृपक्ष में मृत्युलोक से पितर पृथ्वी पर आते है और अपने परिवार के लोगों को आशीर्वाद देते हैं जिससे घर में खुशहाली आती है. माना जाता है कि जो व्यक्ति पितृ पक्ष में अपने पितरों का तर्पण और श्राद्ध कर्म नहीं करता, उसके जीवन में कई तरह की परेशानियां आती है.

पितृपक्ष के 15 दिन पितरों को समर्पित होते है. श्राद्ध पक्ष भाद्रपक्ष की पूर्णिणा से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या तक चलते हैं..भाद्रपद पूर्णिमा को उन्हीं का श्राद्ध किया जाता है जिनका निधन साल की किसी भी पूर्णिमा को हुआ हो .शास्त्रों मे कहा गया है कि साल के किसी भी पक्ष में, जिस तिथि को परिजन का देहांत हुआ हो उनका श्राद्ध कर्म उसी तिथि को करना चाहिए.

यदि आपको अपने पित्तरों की मृत्यु की तारीख नहीं पता है तो आप सर्व पितृ अमावस्या पर उनका श्राद्ध कर सकते हैं. ऐसा करने से भी आपको पितृ दोष से मु्क्ति मिल जाएगी. पितृ पक्ष में आपको कौवों को भोजन जरूर कराना चाहिए. ऐसा माना जाता है कि इस समय हमारे पितृ कौवों के रूप में धरती पर आते हैं.

हालांकि इस साल मोक्षदायिनी 'गया' की धरती पर पिंडदान नहीं किया जा सकेगा.कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए बिहार सरकार ने ये फैसला लिया है. हालांकि आप सभी तरह के कर्मकांड और दान आदि अपने घर पर रह कर सकते हैं.

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