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पांच करोड़ की जापानी मशीन से संवरेगी 'गीता प्रेस' की पुस्तकें, हर रोज बिकती है 50 हजार किताबें

👤 manish kumar | Updated on:29 Nov 2020 4:57 AM GMT

पांच करोड़ की जापानी मशीन से संवरेगी गीता प्रेस की पुस्तकें, हर रोज बिकती है 50 हजार किताबें

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गोरखपुर। विश्व की सर्वाधिक धार्मिक पुस्तकें प्रकाशित करने वाली संस्था गीता प्रेस में शीघ्र ही आधुनिक तकनीकों से लैस जापानी मशीन लगेंगी। इसकी कीमत पांच करोड़ बताई जा रही है। इस मशीन के लगने के बाद प्रतिदिन प्रकाशित होने वाली पुस्तकों की संख्या तो बढ़ेगी ही, बल्कि पुस्तकों को और सुंदर रुप भी मिलेगा। इस मशीन का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों किया जाएगा।

गीता प्रेस के उत्पाद प्रबंधक लालमणि तिवारी ने बताया कि किताबों के प्रकाशन की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए पांच करोड़ रुपये की एक प्रिंटिग मशीन जापान से आयात की जा रही है। यह मशीन चार रंग में पत्रिकाओं और पुस्तकों का प्रकाशन होगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जनवरी में मशीन का उद्घाटन करेंगे।

राम मंदिर परिसर में स्थापित हो सकता है गीता प्रेस का शोरुम

गीता प्रेस प्रबन्धन द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की गई है कि राम मंदिर परिसर में गीता प्रेस का शोरूम स्थापित कराने की अनुमति गीता प्रेस को दी जाए। मुख्यमंत्री ने अयोध्या प्रशासन को इस बाबत अनुरोध पत्र भेजने को कहा है ताकि आगे की कार्यवाही की जा सके।

कल्याण को हैंडलिंग चार्ज से मुक्त कराने की मांग

ट्रस्टी देवीदयाल अग्रवाल और उत्पाद प्रबंधक लालमणि तिवारी ने कल्याण पत्रिका भेजने के लिए डाकघर द्वारा लिए जा रहे हैंडलिंग चार्ज को खत्म कराने की अपील मुख्यमंत्री से की। बता दें कि लगभग आठ से 10 हजार प्रतियां एक दिन में रजिस्ट्री या बुकपोस्ट से भेजी जाती हैं। डाकघर भी गीता प्रेस के परिसर में ही है लेकिन उसके पास न तो इतना स्थान है और न कर्मचारी कि वह अपने पास पत्रिका को रख सके। गीता प्रेस ने डाक विभाग की मदद के लिए परिसर में अतिरिक्त स्थान और संसाधन उपलब्ध कराया है। कल्याण के प्रेषण का कार्य वहीं से होता है।

डाक विभाग संस्था से हैंडलिंग चार्ज के रूप में दो साल से प्रति पत्रिका दो रुपये 70 पैसे लेता है। करीब 90 साल पहले यानी 1923 में स्थापित गीता प्रेस द्वारा अब तक 45.45 करोड़ से भी अधिक प्रतियों का प्रकाशन किया जा चुका है। इनमें 8.10 करोड़ भगवद्गीता और 7.5 करोड़ रामचरित मानस की प्रतियाँ हैं। गीता प्रेस में प्रकाशित महिला और बालोपयोगी साहित्य की 10.30 करोड़ प्रतियों पुस्तकों की बिक्री हो चुकी है।

कल्याण की हर माह 2.30 लाख प्रतियां बिकती

गीता प्रेस की लोकप्रिय पत्रिका कल्याण की हर माह 2.30 लाख प्रतियां बिकती हैं। बिक्री के पहले बताए गए आंकड़ों में कल्याण की बिक्री शामिल नहीं है। गीता प्रेस की पुस्तकों की माँग इतनी ज्यादा है कि यह प्रकाशन हाउस मांग पूरी नहीं कर पा रहा है। औद्योगिक रूप से पिछडे़े पूर्वी उत्तर प्रदेश के इस प्रकाशन गृह से हर साल 1.75 करोड़ से ज्यादा पुस्तकें देश-विदेश में बिकती हैं।

हर रोज 50,000 से ज्यादा किताबें बिकती

गीता प्रेस के प्रोडक्शन मैनेजर लालमणि तिवारी कहते हैं, हम हर रोज 50,000 से ज्यादा किताबें बेचते हैं। दुनिया में किसी भी पब्लिशिंग हाउस की इतनी पुस्तकें नहीं बिकती हैं। धार्मिक किताबों में आज की तारीख में सबसे ज्यादा माँग रामचरित मानस की है।

गीताप्रेस का उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं

गोयन्दका ने कहा कि हमारे कुल कारोबार में 35 फीसदी योगदान रामचरित मानस का है। इसके बाद 20 से 25 प्रतिशत का योगदान भगवद्गीता की बिक्री का है। गीता प्रेस की पुस्तकों की लोकप्रियता की वजह यह है कि हमारी पुस्तकें काफी सस्ती हैं। साथ ही इनकी प्रिटिंग काफी साफसुथरी होती है और फोंट का आकार भी बड़ा होता है। गीताप्रेस का उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं है। यहाँ सद्प्रचार के लिए पुस्तकें छपती हैं।

गीता प्रेस के कुल प्रकाशनों की संख्या 1,600

गीता प्रेस की पुस्तकों में हनुमान चालीसा, दुर्गा चालीसा और शिव चालीसा की कीमत एक रुपये से शुरू होती है। गीता प्रेस के कुल प्रकाशनों की संख्या 1,600 है। इनमें से 780 प्रकाशन हिन्दी और संस्कृत में हैं। शेष प्रकाशन गुजराती, मराठी, तेलुगू, बांग्ला, उड़िया, तमिल, कन्नड़, अंग्रेजी और अन्य भारतीय भाषाओं में हैं। रामचरित मानस का प्रकाशन नेपाली भाषा में भी किया जाता है।

मासिक पत्रिका कल्याण की लोकप्रियता कुछ अलग

कई प्रकाशनों के बावजूद गीता प्रेस की मासिक पत्रिका कल्याण की लोकप्रियता कुछ अलग ही है। माना जाता है कि रामायण के अखंड पाठ की शुरुआत कल्याण के विशेषांक में इसके बारे में छपने के बाद ही हुई थी। कल्याण की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शुरुआती अंक में इसकी 1,600 प्रतियाँ छापी गयी थीं, जो आज बढ़कर 2.30 लाख पर पहुँच गयी हैं। गरुड़, कूर्म, वामन और विष्णु आदि पुराणों का पहली बार हिन्दी अनुवाद कल्याण में ही प्रकाशित हुआ था। योगी आदित्यनाथ गीतापुर प्रेस के संरक्षक हैं। (हि.स.)

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