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मॉरीशस में भी धूमधाम से मनाई जाती है महाशिवरात्रि

👤 veer arjun desk 5 | Updated on:2019-03-03T21:40:59+05:30
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डॉ. श्रीनाथ सहाय

विश्व के कई देशों में भारतीय मूल के लोग बसे हुए हैं। जहां-जहां भारतीय हिंदू हैं, वहां-वहां उनके देवी-देवता और देवालय। उनसे जुड़े व्रत-त्यौहार भी उतनी ही श्रद्धा एवं उल्लास से मनाए जाते हैं। शिव, शिवालय और शिवरात्रि की त्रई इस कथन का सर्वोत्तम उदाहरण हैं। अपने देश के पड़ोसी हिंदू राष्ट्र नेपाल से लेकर सुदूर मॉरीशस, सूरीनाम, गुयाना, त्रिनिदाद, फीजी इत्यादि देशों में शिवरात्रि का पर्व किसी न किसी रूप में उसी श्रद्धा से मनाया जाता है, जितनी श्रद्धा से अपने यहां मनाते हैं। इतिहास, संस्कृति, लोकतांत्रिक मूल्यों और पुरखों के घनिष्" संबंधों से जुड़े मॉरीशस में भारत की भावना और घ्वनि सर्वव्यापी है और मॉरीशस में उनकी गूंज सुनाई देती है। भारत की भांति मॉरीशस में भी महाशिवरात्रि बड़े धूमधाम और उत्साह से मनाई जाती है। यह पर्व देवों के देव महादेव कहे जाने वाले शिव और आदिशक्ति स्वरूपा देवी पार्वती के शुभ-विवाह के अवसर पर मनाया जाता है।

जब भगवान शिव की महिमा का वर्णन किया जाता है तो भगवान शिव से जुड़े ज्योतिर्लिंगों का बखान किया जाता है। पायः बारह ज्योतिर्लिंगों की फ्रतिष्"ा है। ये भारत में ही हैं लेकिन विश्व का तेरहवां शिव ज्योतिर्लिंग मॉरीशस में हैं। इस बात को कम ही लोग जानते हैं। मॉरीशस का फ्रसिद्ध `मॉरीशसेश्वर नाथ' नामक शिव मंदिर ही तेरहवां ज्योतिर्लिंग हैं। इसे हम मॉरीशस का केदारनाथ अथवा रामेश्वर कह सकते हैं। यों तो मॉरीशस बहुत ही सुंदर द्वीप है। हिंद महासागर के हरित नील वर्णी जल में रखे चमकीले मोती जैसा एक आकर्षक टापू। लेकिन वह इंद्रधनुषों का देश है और अपनी संस्कृति में वैविध्यपूर्ण। इसीलिए सांस्कृतिक अभिरुचि के अध्येताओं के लिए यह एक आश्चर्यजनक समाज है। विभिन्न धर्मों के लोग यहां निवास करते हैं। फिर भी वे रुचिपूर्वक कुल आबादी के 52 फ्रतिशत भारतीय समाज के त्यौहारों में सम्मिलित होते हैं। इन त्यौहारों में यहां सर्वाधिक महत्वपूर्ण त्यौहार है-शिवरात्रि।

आज से 22 वर्ष पूर्व मैंने सन 1997 को मॉरीशस की यात्रा की थी। यात्रा के दौरान मेरी मुलाकात मॉरीशस के तत्कालीन राष्ट्रपति कासिम मुत्तीन से हुई थी। राष्ट्रपति कासिम मुत्तीन से मेरी भारतीय सभ्यता-संस्कृति के बारे में गंभीर व विशद् चर्चा हुई। भारतीय त्यौहारों विशेषकर महाशिवरात्रि के बारे में राष्ट्रपति कासिम मुत्तीन की जानकारी और विशेष लगाव से मैं अंचभित रह गया। उस यात्रा की स्मृतियां आज भी मेरे मनोमस्तिष्क में पूरी तरह जीवंत और तरोताजा हैं। महाशिवरात्रि के दिन मॉरीशस में भारत की तरह ही चहल-पहल और उत्साह चारों ओर देखने को मिलता है। `छोटे भारत' के रूप में फ्रसिद्ध इस देश पर भारतीय संस्कृति और भारतीयता की गहरी छाप है। आखिर क्यों न हो, यहां सा" फीसदी से ज्यादा भारतीय हैं और राजनीति तथा समाज पर उनकी गहरी पकड़ है। क्या भोजन, क्या पहनावा, क्या रीति-रिवाज, क्या धर्म, क्या संगीत, क्या मनोरंजन... भारत हर कहीं दिखता है। मॉरीशस महाशिवरात्रि धूमधाम से मनाई जाती हैöकिसी राष्ट्रीय त्यौहार की तरह। उत्तर भारत की ही तरह यहां भी कांवड़ यात्राएं निकाली जाती हैं और मेले लगते हैं। आफ्रवासी घाट से, जहां 180 वर्ष से अधिक समय पहले भारत के गिरमिटिया मजदूरों का पहला बैच गन्ना बागानों में काम करने के लिए आए थे, लेकर पोर्ट लुई के चमचमाते साइबर टावर तक, मॉरीशस का एक आधुनिक, आत्मविश्वास से भरपूर और पुनरुत्थानशील के रूप में सफर और रूपांतरण मूल रूप में भारतीयों और भारत की कहानी के साथ जुड़ा हुआ है।

हम हिन्दुस्तानी जहां कहीं भी जाते हैं, अपनी छाप छोड़ देते हैं। बहुत से देश हैं जहां पर हिन्दुस्तानियों की तादाद बहुत ज्यादा है, कुछ तो ऐसे देश हैं जो हमारा दूसरा घर बन गये हैं। बस इसी परंपरा के आधार पर मॉरीशस में स्थित हमारे भारतीयों ने गंगा जी का अंतिम छोर ही बदल दिया। गंगोत्री से निकली गंगा नदी का अंतिम छोर अब बनारस नहीं, परन्तु मॉरीशस हैं। जैसा मैंने बताया कि शिवरात्रि के त्यौहार ने राष्ट्रीय स्वरूप ग्रहण कर लिया है। मॉरीशस के दक्षिण पश्चिम में स्थित गंगा तालाब पर पूरा मॉरीशस उमड़ पड़ता है। 110 वर्ष पूर्व भारत की पवित्र नदियों से फ्रतीकात्मक रुप से जल लाकर `परी तालाब' में डाला गया और इसे नाम दिया गया `गंगा तालाब'। गंगा तलाव एक केटर (शांत ज्वालामुखी पर स्थित) तालाब है जो सवान्ने जिला के पहाड़ी इलाके में स्थित है। यह तलाब समुद्र तट से 1800 किमी ऊपर और मॉरीशस के दिल में स्थित है। यह स्थल मॉरीशस में बसे हिन्दू भाइयों के लिए सबसे पवित्र जगह है, मानो जैसे कि यहीं इनके चारों धाम हैं। इसी तालाब के पास बना है तेरहवां ज्योतिर्लिंग मारीशेश्वरस। मॉरीशस में शिव की तीसरी सबसे बड़ी फ्रतिमा है जिसकी ऊंचाई 108 फीट है। समुद्र तल से 1800 फीट ऊंचाई पर शिव की ये अनुकृति खड़ी मुद्रा में हैं जो त्रिशूल धारण किए हुए हैं। ग्रैंड बेसिन में स्थित गंगा सरोवर वास्तव में एक सुरम्य फ्राकृतिक झील है। इसे `परी तालाब' भी कहा जाता है। लोग कहते हैं कि इस तालाब के बीच में जो धरती का टुकड़ा है, वहा परियों की नाट्यशाला थी। रोज रात को परिया यहा नृत्य करती थीं। एक ग्वाला उन परियों का नृत्य रातभर छिप-छिपकर देखता था। एक दिन वह सूर्योदय से पूर्व चुपचाप अपने घर नहीं लौट सका। परियों ने उसे देख लिया और वह पत्थर का हो गया। आज `मुड़िया पहाड़' के रूप में मॉरीशस का जो सबसे महत्वपूर्ण पहाड़ दिखाई देता है, वह वही ग्वाला है। इस पहाड़ की आकृति "ाrक ऐसी है कि लगता है कोई मानव आकृति न जाने कब से यों ही पत्थर बनी बै"ाr हैं। लेकिन यह `परी तालाब' अब `गंगा सरोवर' है। लोगों का विश्वास है कि यहां गंगा का अवतरण हुआ था। यहां के वासियों के लिए यह झील ही गंगा है।

शिवरात्रि के एक दिन पूर्व मॉरीशस के गांव-गांव और मोहल्ले-मोहल्ले से हजारों भक्तगण पैदल चलकर गंगा तालाब पहुंचते हैं। भोलेनाथ की इस मूर्ति को बनने में एक वर्ष का समय लगा था। गंगा तलाब के बगल में ही शिव जी, हनुमान जी और मां लक्ष्मी का एक भव्य मंदिर भी स्थित है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर सभी तीर्थयात्री अपने घर से इस तलाव तक नंगे पैर चलकर जाते हैं। मॉरीशस में शिवरात्रि राष्ट्रीय धार्मिक पर्व पूरे उल्लास के साथ मनाया जाता है। लोग व्रत रखते हैं, शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। फ्रतिमाएं विसर्जित करते हैं और गंगा सरोवर का पवित्र जल श्रद्धापूर्वक अपने घरों को ले जाते हैं। कहा जाता है कि यह जल भी गंगा के समान शुद्ध है और महीनों तक खराब नहीं होता। गंगा तालाब के इस अमृतमयी जल से फिर अपने-अपने घरों के पास शिवालयों में जलाभिषेक किया जाता है। महाशिवरात्रि का आस्था भरा यह नयनाभिराम दृश्य देखकर लगता है कि हम अपने देश भारत में विचरण कर रहे हैं। शिवरात्रि इनका सबसे बड़ा पर्व होने के साथ-साथ राष्ट्रीय पर्व भी है और एक-दो दिन नहीं, पूरे सप्ताह चलता है। श्रद्धालुओं की भीड़ देखकर आभास होता है कि मानो सारा मॉरीशस ही यहां उमड़ आया हो।

सन 1897 में दो पुजारी ने यह सपने में देखा की `ग्रैंड बस्सिन' के तलाब का पानी जानवी से उत्पन्न हुआ और गंगा जी का एक हिस्सा बन गया। पुजारियों को आये इस सपने की खबर पूरी मॉरीशस में फैल गई। इसी वर्ष तीर्थयात्री `ग्रैंड बस्सिन' तक चल कर गए, तलाब में से पानी लिया और महाशिवरात्रि के पर्व पर शिव जी को अर्पित किया। इस गंगा तलाब का संचालन मॉरीशस सनातन धर्मं मंदिर संस्थान और हिन्दू महासभा करती है। बस तब से यह परंपरा बन गई है कि हर शिवरात्रि को श्रद्धालु गंगा तलाब तक चल कर यात्रा करते हैं। वर्ष 2015 में हमारे फ्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस तलाब में गंगा जल अर्पित किया और महादेव जी की पूजा भी की थी। अब यही गंगा तालाब मॉरीशस में स्थित सभी धर्मों, संफ्रदाय और वर्ण के लोगों के लिए एक पवित्र भूमि बन गई है। आज हम भारत में रहकर भी अपने संस्कृति, संस्कार अपने परिवेश और परंपराओं से कट रहे हैं, अपनी बोली अपनी पहचान खो रहे हैं, ऐसे में यहां से सैकड़ों किलोमीटर दूर यातानाओं भरी पराधीन जीवन स्थितियों में भी अपने मूल्य और सरोकारों को बचाए रखना बड़ा संदेश नहीं है, हम सबके लिए संदेश भी है। भारत और भारतीयता के पति इन भारतवंशियों का यह लगाव व समर्पण हम सबके लिए एक सीख है। अंततः शिव आदि हैं अनंत है...शिव सत्य हैं और सुंदर भी...कहने का भाव ये है कि भगवान शिव की महिमा अपरंपार है...यही वजह है कि दुनियाभर में भगवान शिव की पूजा होती है।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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