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हर किसी ने बोया किसानों की आंखों में सपना

👤 Veer Arjun Desk 4 | Updated on:8 May 2019 6:34 PM GMT
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जब 2016 में बजट पेश करते हुए वित्तमंत्री अरुण जेटली ने यह कहा था कि मैं किसानों के पति आभारी हूं कि वे हमारे देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ है, तब यह आशा जगी थी कि सरकार किसानों के मामले में दो कदम आगे रहेगी पर रेडियो में मन की बात से लेकर किसानों के मन जीतने तक की सारी कवायद के बावजूद किसानों के हालात बेपटरी है। हालांकि चुनावी दांव चलते हुए 2019 के बजट में पधानमंत्री मोदी ने किसानों को पतिमाह 500 रुपए देने का वादा किया। जो साल भर में कुल 6 हजार रुपए तीन बार में दिए जाएंगे जिसकी पहली किस्त 2 हजार रुपए की फिलहाल जारी की जा चुकी है। इस बार बजट कार्यवाहक वित्तमंत्री पीयूष गोयल ने पेश किया था। 2016 में ही अरुण जेटली ने यह भी कहा था कि किसानों को आय सुरक्षा देनी होगी शायद साल भर में 6 हजार रुपए किसानों को देना उसी का नतीजा है। पर इसमें कोई शक नहीं कि यह रकम बहुत मामूली है मगर शुरुआत सराहनीय है। इसके अलावा भी इस बार के बजट में किसानों को बहुत कुछ राहत देने की बात रही है जो खेती-किसानी और कृषि उन्मुख कही जा सकती है। बावजूद इसके लगातार आत्महत्या की आती खबरे इस यकीन को भी नुकसान पहुंचाने का काम किया। कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र को देखें तो आर्थिक विकास दर को लेकर इनमें व्यापक अंतर है और सबसे खराब विकास दर वाली कृषि में देश की आधी आबादी फंसी है। कृषि विकास के मामले में पिछले 70 सालों से पूरा पयास जारी है परंतु किसानों की किस्मत मानो टस से मस होने का नाम नहीं ले रही। पत्येक सेक्टर के विकास के अपने मॉडल होते हैं। जाहिर है कृषि को जब तक वाजिब मॉडल नहीं मिलेगा तब तक यह कराहती रहेगी बेशक इस पर करोड़ों क्यों न लुटा दिए जाएं। सुशासन की भी यही राय है कि ऐसा न्याय जो समय से हो, सार्थक हो और समुचित के साथ बार-बार हो। कृषि और किसानों के मामले में ये तमाम न्याय अधूरे ही सिद्ध हुए हैं। यदि सरकार को एक सामाजिक कार्यकर्ता के पारूप में भी ढाल के देखें तो यहां भी मान्य परिभाषा यही कहती है कि कृषि और किसान की ऐसी मदद की जाए कि वे अपनी सहायता स्वयं करने लायक बन सके। 15 अगस्त 2017 को लाल किले से देश को संबोधन करते हुए पधानमंत्री मोदी ने किसानों की जिन्दगी बदलने के लिए जिस रास्ते का उल्लेख किया वह कृषि संसाधनों से ताल्लुक रखता है जिसमें उत्तम बीज, पानी, बिजली की बेहतर उपलब्धता के साथ बाजार व्यवस्था को दुरुस्त करना शामिल है। देश में बनने वाली कृषि नीतियां भी इनकी बदकिस्मती को नहीं बदल पाई।

-जसपाल सिंह,

पंजाबी बाग, दिल्ली।

लोकतंत्र के महायज्ञ में हमारी भी भागीदारी जरूरी

17वीं लोक सभा के चुनावों का विगुल बज चुका हैं। सात चरणों में होने वाले चुनावों के लिए दो चरणों की 188 सीटों के लिए नामांकन का काम भी पूरा हो गया है। इन सीटों पर नाम वापसी के बाद चुनाव में खड़े होने वाले पत्याशियों की स्थिति भी साफ हो जाएगी। आने वाले दिनों में बाकी चरणों के चुनावों की अधिसूचना जारी होने से नामांकन भरने तक का काम आरंभ हो जाएगा। 19 मई तक सात चरणों में चुनाव का कार्य लगभग पूरा हो जाएगा और फिर सब की नजर 23 मई को होने वाली मतगणना की और लगा रहेगा। देशवासियों को चुनाव आयोग पर गर्व है। समूची दुनिया में हमारी चुनाव पणाली को श्रेष्"ता की नजरों से देखा जाता है। यह दूसरी बात है कि हमारे देश में ही हारने वाले दलों द्वारा ईवीएम को लेकर पश्न उ"ाए जाते रहे हैं जिन्हें चुनाव आयोग ने सिरे से खारिज करते हुए खुली चुनौती देकर लगभग नकार दिया है। चुनावों के साथ ही आया राम-गया राम का दौर भी शुरू हो गया है। लोक-लुभावन घोषणाओं का दौर आरंभ हो गया है। चुनाव रैलियों के दौर में आने वाले समय में न जाने कितने नारे उछलेंगे और मतदान के दिन ज्यों-ज्यों पास आएंगे त्यों त्यों चुनाव के मुद्दों में से भी न जाने कौन-सा मुद्दा रहेगा और कौन सा पर्दे के पीछे चला जाएगा पर इन सबसे परे जो महत्वपूर्ण बात है वह यह कि चुनाव आयोग ने समूचे देश में साफ-सुथरा चुनाव कराने की पूरी तैयारी कर ली है। इस बार के चुनावों की खास बात यह है कि देश के सभी 543 लोकसभा सीटों के मतदान केंद्रों पर वीवीपैट मशीने लगाई जाएगी। यह अवश्य है कि पहले की तरह वीवीपैट और ईवीएम के मिलान का कार्य होगा हांलाकि सभी केंद्रों के मिलान के कार्य को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में पकरण विचाराधीन है और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय व निर्देशों के बाद स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकेगी पर एक बात साफ है कि सभी मतदान केंद्रों पर ईवीएम के साथ वीवीपैट मशीन लगाने से चुनावों में और अधिक पारदर्शिता आ सकेगी। इसके साथ ही चुनाव आयोग ने जो दूसरा फैसला इस साल के चुनावों के लिए किया है वह है ईवीएम मशीनों में पत्याशियों की फोटे को भी पदर्शित करने का निर्णय है। इससे अब मतदाता किसी भी भ्रम में नहीं रहेगा और समान नाम या चुनाव चिन्ह से मिलते जुलते नामों के चलते मतदान के समय मतदाता के सामने गफलत की स्थिति नहीं रहेगी। इसी कारण से चुनाव आयोग ने अभ्यर्थियों से नवीनतम पासपोर्ट आकार की फोटो संलग्न करने को कहा है। तीसरी और महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बार चुनाव आयोग जीपीएस ट्रेकिंग व्यवस्था लागू करने जा रहा है। इससे मुख्यालय से लेकर मतदान केंद्र और फिर मतगणना स्थल तक ईवीएम की ट्रेकिंग होने के साथ ही चुनाव अधिकारियों की भी ट्रेकिंग हो सकेगी। चुनाव आयोग ने फोटो युक्त मतदाता सूची तैयार कर ली है। करीब 99.36 प्रतिशत मतदाताओं के फोटो पहचान पत्र बन गए हैं। इसके साथ ही अब चुनाव आयोग ही चुनावों को साफ-सुथरा बनाए रखने को ध्यान में रखा जा रहा है।

-शशि शर्मा,

मंडावली, दिल्ली।

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